दक्षिणी लेबनान में बढ़ता तनाव और इजरायल हिजबुल्लाह के बीच सीधा टकराव

दक्षिणी लेबनान में बढ़ता तनाव और इजरायल हिजबुल्लाह के बीच सीधा टकराव

दक्षिणी लेबनान की पहाड़ियां इस वक्त बारूद की गंध से भरी हैं। इजरायली टैंकों के गोलों और हिजबुल्लाह के रॉकेटों ने पूरे इलाके को एक ऐसे युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है जहां अब कूटनीति के लिए जगह कम और धमाकों के लिए ज्यादा दिखती है। ये महज सीमा पर होने वाली छोटी झड़पें नहीं हैं। ये एक पूर्ण युद्ध की आहट है जो पूरे मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले सकती है। जमीन पर इजरायली मर्कवा टैंकों की गड़गड़ाहट है और आसमान हिजबुल्लाह के कात्युशा रॉकेटों की सफेद लकीरों से पटा पड़ा है।

इतिहास खुद को दोहरा रहा है पर इस बार तीव्रता बहुत ज्यादा है। 2006 के युद्ध के बाद से दोनों पक्षों ने अपनी ताकत को कई गुना बढ़ा लिया है। आज का हिजबुल्लाह सिर्फ एक छापामार गुट नहीं है। उसके पास हज़ारों की संख्या में सटीक मार करने वाली मिसाइलें और ड्रोन्स हैं। वहीं इजरायल इस बार अपनी उत्तरी सीमा को पूरी तरह सुरक्षित करने की कसम खा चुका है। हज़ारों इजरायली नागरिक अपने घरों को छोड़ चुके हैं और वे तब तक वापस नहीं लौटेंगे जब तक हिजबुल्लाह को लिटानी नदी के पीछे नहीं धकेल दिया जाता।

टैंकों की आग और लेबनान का भूगोल

इजरायली डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने दक्षिणी लेबनान के कठिन रास्तों पर अपने टैंक उतार दिए हैं। ये टैंक सिर्फ लोहे के डिब्बे नहीं हैं बल्कि चलते-फिरते कमांड सेंटर हैं। मर्कवा मार्क 4 टैंक की सुरक्षा दीवार को भेदना आसान नहीं है पर हिजबुल्लाह ने भी अपने पास 'कोर्नेट' जैसे खतरनाक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल जमा कर रखे हैं। लेबनान की पहाड़ियां और संकरी घाटियां हिजबुल्लाह को छिपकर हमला करने का मौका देती हैं। इजरायल को पता है कि जमीनी हमला किसी दलदल में फंसने जैसा हो सकता है।

हिजबुल्लाह ने सालों लगाकर इस इलाके में सुरंगों का एक जाल बिछाया है। ये सुरंगें उनकी जीवनरेखा हैं। जब इजरायली तोपें ऊपर से गोले बरसाती हैं तो हिजबुल्लाह के लड़ाके इन सुरंगों के अंदर सुरक्षित रहते हैं और अचानक बाहर निकलकर हमला करते हैं। इजरायल के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन ठिकानों को ढूंढकर तबाह करना है। टैंकों का इस्तेमाल यहां सिर्फ जमीन कब्जाने के लिए नहीं बल्कि हिजबुल्लाह की अग्रिम चौकियों को पूरी तरह मिटाने के लिए किया जा रहा है।

आसमान से बरसती मौत और रॉकेटों का खेल

हिजबुल्लाह का सबसे बड़ा हथियार उसका रॉकेट आर्सेनल है। उनके पास करीब 1,50,000 रॉकेटों का जखीरा होने का अनुमान है। इसमें छोटे रॉकेटों से लेकर लंबी दूरी की मिसाइलें तक शामिल हैं जो तेल अवीव तक पहुंच सकती हैं। इजरायल का 'आयरन डोम' सिस्टम इन रॉकेटों को रोकने में काफी हद तक सफल रहा है लेकिन जब सैकड़ों रॉकेट एक साथ दागे जाते हैं तो कोई भी सिस्टम शत-प्रतिशत गारंटी नहीं दे पाता।

रॉकेटों के इस हमले ने इजरायल के उत्तरी शहरों को 'भूतिया शहर' बना दिया है। किर्यत शमोना और मेटुला जैसे इलाकों में सन्नाटा पसरा है। वहां रहने वाले लोग अब होटलों या रिश्तेदारों के यहाँ शरण लिए हुए हैं। हिजबुल्लाह का मकसद साफ है। वे इजरायल को आर्थिक और मनोवैज्ञानिक रूप से थका देना चाहते हैं। वे जानते हैं कि वे इजरायल को सैन्य रूप से हरा नहीं सकते पर वे उसे एक लंबी और महंगी जंग में उलझा जरूर सकते हैं।

ड्रोन्स की नई चुनौती

इस बार की जंग में ड्रोन्स का रोल बहुत बड़ा हो गया है। हिजबुल्लाह अब सिर्फ रॉकेट नहीं दाग रहा बल्कि वह आत्मघाती ड्रोन्स का इस्तेमाल कर रहा है। ये ड्रोन्स आयरन डोम की नजरों से बचकर इजरायली सैन्य ठिकानों पर गिर रहे हैं। इजरायल ने भी अपनी वायुसेना को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। लेबनान के आसमान में दिन-रात इजरायली फाइटर जेट्स की आवाज सुनाई देती है जो हिजबुल्लाह के लॉन्च पैड्स को निशाना बना रहे हैं।

आम नागरिकों की कीमत और मानवीय संकट

युद्ध में हमेशा सबसे बड़ी कीमत आम आदमी चुकाता है। दक्षिणी लेबनान के गांवों से हजारों लेबनानी परिवार बेघर हो चुके हैं। बेरूत की सड़कों पर भीड़ बढ़ रही है और लोगों के पास रहने की जगह नहीं है। लेबनान की अर्थव्यवस्था पहले से ही चरमराई हुई थी और अब इस जंग ने उसे पूरी तरह तबाह करने की कगार पर खड़ा कर दिया है। लोग बुनियादी चीजों जैसे खाना, दवा और बिजली के लिए तरस रहे हैं।

दूसरी तरफ इजरायल में भी स्थिति सामान्य नहीं है। रॉकेटों के सायरन बजते ही लोगों को बंकरों की तरफ भागना पड़ता है। स्कूल बंद हैं और व्यापार ठप पड़ा है। दोनों तरफ के लोग डरे हुए हैं कि अगर ये युद्ध और बढ़ा तो क्या होगा। हिजबुल्लाह का कहना है कि वे गाजा के समर्थन में ये सब कर रहे हैं पर हकीकत ये है कि लेबनान खुद अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।

क्या ईरान सीधे इस जंग में कूदेगा

ये सवाल आज पूरी दुनिया पूछ रही है। हिजबुल्लाह ईरान का सबसे भरोसेमंद प्रॉक्सी है। ईरान उसे पैसा, हथियार और ट्रेनिंग देता है। अगर इजरायल हिजबुल्लाह को खत्म करने के करीब पहुंचता है तो क्या ईरान चुप रहेगा? अब तक ईरान ने परदे के पीछे से ही खेल खेला है लेकिन इस बार तनाव का स्तर इतना ज्यादा है कि एक भी गलत कदम पूरे क्षेत्र को महायुद्ध की तरफ ले जा सकता है।

इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर घरेलू दबाव भी बहुत ज्यादा है। इजरायली जनता चाहती है कि उत्तरी सीमा को हमेशा के लिए सुरक्षित किया जाए। इसके लिए अगर उन्हें लेबनान के अंदर तक घुसना पड़े तो वे पीछे नहीं हटेंगे। अमेरिका भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और वह नहीं चाहता कि ये जंग और फैले पर इजरायल के लिए अपनी सुरक्षा सर्वोपरि है।

जमीनी हकीकत और आगे का रास्ता

जंग के मैदान में बातें कम और धमाके ज्यादा होते हैं। अभी जो हम देख रहे हैं वो सिर्फ ट्रेलर हो सकता है। अगर हिजबुल्लाह ने अपनी भारी मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू किया तो इजरायल की तरफ से प्रतिक्रिया बहुत भीषण होगी। बेरूत जैसे शहरों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इजरायल ने चेतावनी दी है कि वह लेबनान को 'पाषाण युग' में वापस भेज देगा।

मौजूदा स्थिति को देखते हुए कुछ चीजें बहुत स्पष्ट हैं:

  • सुरंगों का युद्ध: इजरायल को लेबनान के अंदर घुसकर सुरंगों को नष्ट करना होगा जो बेहद जोखिम भरा काम है।
  • तकनीकी श्रेष्ठता: इजरायल की वायुसेना और खुफिया जानकारी हिजबुल्लाह पर भारी पड़ रही है पर हिजबुल्लाह के पास 'होम ग्राउंड' का फायदा है।
  • अंतरराष्ट्रीय दबाव: दुनिया के बड़े देश युद्धविराम की कोशिश कर रहे हैं पर फिलहाल दोनों पक्षों में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं है।

यह जंग सिर्फ दो सेनाओं के बीच नहीं है। यह दो विचारधाराओं और दो क्षेत्रीय ताकतों के बीच का टकराव है। लेबनान की पहाड़ियों में गूंजते धमाके इस बात की गवाही दे रहे हैं कि आने वाले दिन बहुत मुश्किल होने वाले हैं। अगर आप इस क्षेत्र की खबरों पर नजर रख रहे हैं तो समझ लीजिए कि दक्षिणी लेबनान अब दुनिया का सबसे खतरनाक फ्लैशप्वाइंट बन चुका है। वहां पल-पल बदलती स्थिति न केवल इजरायल और लेबनान बल्कि पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति और वैश्विक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।

सावधान रहना और विश्वसनीय स्रोतों से अपडेट रहना ही इस वक्त सबसे बेहतर रणनीति है। अगर आपके पास इस युद्ध के आर्थिक प्रभाव या सुरक्षा से जुड़े सवाल हैं तो विशेषज्ञों की राय और ग्राउंड रिपोर्ट्स को बारीकी से देखें। स्थिति अब किसी भी तरफ मुड़ सकती है।

LS

Lin Sharma

With a passion for uncovering the truth, Lin Sharma has spent years reporting on complex issues across business, technology, and global affairs.